1. बात पिछले दिनों की है कि मैंने कुछ चेहरे तैल-चित्र में बनाये थे . सभी काल्पनिक थे . उनमें से कुछ आकर्षक व कुछ तो किसी को भी (घर में) पसंद नहीं आ रहे थे . लेकिन ये चेहरे उत्पत्ति थे शायद मेरे अर्ध-चैतन्य चिंतन के .. और वैसे भी ये मेरा बस एक प्रयोग था . इस प्रयोग में जो चेहरे आकर्षक नहीं लग रहे था .. मेरा यकीन मानिये कि ये अनाकर्षक चेहरे कुछ लोगों को इतने पसंद आये कि उनने उसे ज़िद कर रख लिया . मैं सोच रहा था .. कि कोई किसी को नापसंद तो वही किसी को बेहद पसंद हो सकता है ..
इस पर किसी सज्जन ने कहा - उपर वाले ने ऐसी कोई चीज ही नहीं बनाई है कि जो हर किसी को नापसंद हो ..
2. कोई मुझे बतलाये कि सड़क पर चलते हुए .. ऐसा क्यों होता है कि कुछ चेहरे कभी अपनापन लिये हुए लगते हैं तो कुछ चेहरों को देखकर कभी अचानक घृणा के भाव उत्पन्न हो जाते हैं जबकि सचाई तो यह है कि कि अच्छे लगने वाले और अच्छे नहीं लगने वाले .. दोनो ही प्रकार के चेहरे .. पहले कभी भी देखे हुए नहीं होते हैं ..
Sunday, April 15, 2012
necessary to get posted..
I thought this .. necessary to get posted -
most dangrous and at times suicidal - is the expression of importance i.e. called the VIP SYNDROME .. by a person, who is ill ..
as this makes the doctor .. to think and work under compulsion ..
most dangrous and at times suicidal - is the expression of importance i.e. called the VIP SYNDROME .. by a person, who is ill ..
as this makes the doctor .. to think and work under compulsion ..
Tuesday, April 10, 2012
मैं सोच रहा था ..
मेरे पास नहीं हैं
फिर भी
मैं
उसे
हर किसी को
बांटने के लिये तैयार हूं ..
कोई कह रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
मैं सहमत था ..
फिर भी
मैं
उसे
हर किसी को
बांटने के लिये तैयार हूं ..
कोई कह रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
मैं सहमत था ..
कि, कोई शिकायत नहीं ..
मुझे तो
बंद घड़ी से भी
कोई शिकायत
नहीं है ..
मैं सोच रहा था ..
कि ..
वह भी तो 24 घंटे में
2 बार ..
सही समय
बतलाती है ..
बंद घड़ी से भी
कोई शिकायत
नहीं है ..
मैं सोच रहा था ..
कि ..
वह भी तो 24 घंटे में
2 बार ..
सही समय
बतलाती है ..
हकीकत है .. कि
हकीकत है
कि
मेरे चारो तरफ ..
जिधर भी नजर घुमाता हूं ..
महान या अत्यंत महान ही
दिखलाई पड़ते हैं ..
मैं सोच रहा था ..
कि ..
सपने में भी
शायद ..
इसलिये
सभी का
स्तुति गान चालू रखता हूं ..
मेरी इन पंक्तियों को पढ़कर किसी ने कहा - कि आप तो डरपोक किस्म के मालूम पड़ते हैं .. सुनकर मैंने कहा - हुजूर .. कृपया 'किस्म' को हटा दीजिये और "बेहद" विश्लेषण जोड़ दीजिये .. क्योंकि .. मैं आपसे भी डरता हूं .. कि आप भी तो अत्यंत महान हैं ..
कि
मेरे चारो तरफ ..
जिधर भी नजर घुमाता हूं ..
महान या अत्यंत महान ही
दिखलाई पड़ते हैं ..
मैं सोच रहा था ..
कि ..
सपने में भी
शायद ..
इसलिये
सभी का
स्तुति गान चालू रखता हूं ..
मेरी इन पंक्तियों को पढ़कर किसी ने कहा - कि आप तो डरपोक किस्म के मालूम पड़ते हैं .. सुनकर मैंने कहा - हुजूर .. कृपया 'किस्म' को हटा दीजिये और "बेहद" विश्लेषण जोड़ दीजिये .. क्योंकि .. मैं आपसे भी डरता हूं .. कि आप भी तो अत्यंत महान हैं ..
Friday, April 6, 2012
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