Saturday, May 12, 2012

लिखना तो
मैं भी चाहता हूं

अपनी
आत्म-कथा
लेकिन
हालात इजाजत नहीं देते
कि
जो सच है
वह मैं लिख नहीं सकता
और
आधारहीन
सोचना भी
मुझे
गवारा नहीं है
मैं सोच रहा था ..
कि
हल्के रंगो का
कोई
कैरेक्टर नहीं होता
कैनवास पर चित्र बनाते
मैं सोच रहा था ..
you may be not a very .. very hard worker and you may not be knowing more than the others but if you are capable of doing - पांच पैसे का काम करके पांच करोड़ की काबिलियत का डंका बजाना .. then you are a successful person .. this is the - todays theory of success ..
मुखौटों की प्रदर्शनी
देखते
मैं सोच रहा था
कि
इनकी
लोगों को
क्या जरूरत है ..
- हर महान आदमी में कोई न कोई असाधारण और असामान्य बात होती है कह देने मात्र से यह कहने वाला और असामान्य अभिव्यक्ति वाला कोई भी व्यक्ति .. महान नहीं हो जाता ..

- यदि कोई मुझे नहीं समझ सका तो इसमें दोष किसका है .. वो कह रहे थे .. मैं सुन रहा था .. मैं सोच रहा था ..

Sunday, May 6, 2012

रोज की तरह
आज भी
सुबह होते ही
लग गया हूं
फिर से
इंसानियत खोजने ..

मैंने देखा था
कई दिन पहले
एक रंगीन स्वप्न
और
अब भी कुछ-कुछ याद आता है
धुंधले से
मुझे
ब्लेक एंड व्हाइट में
वो दृष्य ..
मैं सोच रहा था ..