This month I completed and got the book published o Ms Sadhna Dhand who is 53 Year old suffering from Osteogenesis Congenita Imperfecta .. This is a rare disease and she is the one among a few survivors in the world with this disease. How she thinks about .. what were her problems in the chilhood and how others react to her .. are all about in this book ..
Saturday, June 30, 2012
Sunday, May 27, 2012
Saturday, May 12, 2012
बात पिछले दिनों की है कि मैंने कुछ चेहरे तैल-चित्र में बनाये थे . सभी काल्पनिक थे . उनमें से कुछ आकर्षक व कुछ तो किसी को भी (घर में) पसंद नहीं आ रहे थे . लेकिन ये चेहरे उत्पत्ति थे शायद मेरे अर्ध-चैतन्य चिंतन के .. और वैसे भी ये मेरा बस एक प्रयोग था . इस प्रयोग में जो चेहरे आकर्षक नहीं लग रहे था .. मेरा यकीन मानिये कि ये अनाकर्षक चेहरे कुछ लोगों को इतने पसंद आये कि उनने उसे ज़िद कर रख लिया . मैं सोच रहा था .. कि कोई किसी को नापसंद तो वही किसी को बेहद पसंद हो सकता है ..
दृष्य एक -
एक – आइने का भला क्या दोष .. तुम्हारी तो सोच ही खंडित है ..
दूसरा – आइना टूटा हुआ है .. इसलिये तो आइने में चेहरा कई टुकड़ों में बट गया है .. यह कहकर उसने आइना बदल दिया और फिर आइने के सामने खड़े होकर अपने चेहरे को मुस्कराते हुए निहारने लगा ..
दृष्य दो -
एक - आइने को दोष मत दो .. जैसे हो वैसा ही तो दिखेगा .. अपनी शकल सुधारो .. कभी-कभी अकल का भी तो उपयोग कर लिया करो ..
दूसरा – पहले ने कपड़े से आइने के उपर की गर्द झाड़ दी और फिर आइने के सामने खड़े होकर अपने चेहरे को मुस्कराते हुए निहारने लगा ..
मैं देख रहा था .. मैं सुन रहा था .. मैं सोच रहा था ..
एक – आइने का भला क्या दोष .. तुम्हारी तो सोच ही खंडित है ..
दूसरा – आइना टूटा हुआ है .. इसलिये तो आइने में चेहरा कई टुकड़ों में बट गया है .. यह कहकर उसने आइना बदल दिया और फिर आइने के सामने खड़े होकर अपने चेहरे को मुस्कराते हुए निहारने लगा ..
दृष्य दो -
एक - आइने को दोष मत दो .. जैसे हो वैसा ही तो दिखेगा .. अपनी शकल सुधारो .. कभी-कभी अकल का भी तो उपयोग कर लिया करो ..
दूसरा – पहले ने कपड़े से आइने के उपर की गर्द झाड़ दी और फिर आइने के सामने खड़े होकर अपने चेहरे को मुस्कराते हुए निहारने लगा ..
मैं देख रहा था .. मैं सुन रहा था .. मैं सोच रहा था ..
एक "साहब" ने किसी डाक्टर को "बुलवाया" .. जांचने के बाद डाक्टर ने कहा - सर .. कोई दिक्कत नहीं .. 'लोकल एनेस्थेशिया' में हो जायेगा .. डाक्टर ने अभी अपनी बात भी पूरी नहीं किया था कि "साहब" ने चिल्लाकर अपने पी.ए. और ड्रायवर को बुलाया और कहा - बाहर निकालो इसे .. किस गधे को ले आये हो .. ये तो 'लोकल' सामान की बात करता है .. कोई बता रहा था .. मैं सुन रहा था .. मैं सोच रहा था ..
Sunday, May 6, 2012
Monday, April 16, 2012
मैं सोच रहा था ..
लिखना तो मैं भी चाहता हूं
अपनी आत्म-कथा
लेकिन
हालात इजाजत नहीं देते
कि
जो सच है
वह मैं लिख नहीं सकता
और
झूठी बातें
तो सोचना भी
मुझे
गवारा नहीं है
मैं सोच रहा था ..
अपनी आत्म-कथा
लेकिन
हालात इजाजत नहीं देते
कि
जो सच है
वह मैं लिख नहीं सकता
और
झूठी बातें
तो सोचना भी
मुझे
गवारा नहीं है
मैं सोच रहा था ..
expression of my unhappyness
I express my unhappyness for the unhealthy remarks as well the unhealthy taggings and the unhealthy expressions in words or in paintings or in the photographs
and also the unhealthy interpretation of simple conversations ..
and also the unhealthy interpretation of simple conversations ..
मैं सोच रहा था ..
गांव की पगडंडी में एक बैलगाड़ी चली जा रही थी
और .. उसके नीचे एक चार पैर वाला जानवर भी चल रहा था ..
चार पैर वाला वह जानवर सोच रहा था कि जैसे बैलगाड़ी वह खुद चला रहा है ..
वो बता रहे थे ..
मैं सुन रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
और .. उसके नीचे एक चार पैर वाला जानवर भी चल रहा था ..
चार पैर वाला वह जानवर सोच रहा था कि जैसे बैलगाड़ी वह खुद चला रहा है ..
वो बता रहे थे ..
मैं सुन रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
वे कह रहे थे - सूरज पूरब से निकलता है ..
लेकिन किसी तथाकथित महान ने सुनकर अत्यंत क्रोधित होकर कहा -
क्या फालतू बात करते हैं .. चुप रहिये .. जब आपको नहीं मालूम है .. आपको मालूम होना चाहिये कि सूरज न तो पश्चिम से और न ही उत्तर से और ना ही दक्षिण से उगता है ..
वह अदना सा व्यक्ति, सामने वाले के सम्मान में, संभवतः सामने वाले का लिहाज करता हुआ, क्रोधित चेहरे को देख रहा था ..
तथाकथित सर्वज्ञाता को प्रणाम कर वह लौट गया ..
वह लौट गया .. तो क्या हुआ ? किसी ने पूछा ..
फिर ..
फिर क्या मालूम क्या हुआ ..
क्योंकि शायद वह शुभचिंतक था इसलिये फिर पलटकर उन्हें क्रोधित करने नहीं जाना चाहता था ..
मैं भी वहां खड़ा था ..
मैं सुन रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
लेकिन किसी तथाकथित महान ने सुनकर अत्यंत क्रोधित होकर कहा -
क्या फालतू बात करते हैं .. चुप रहिये .. जब आपको नहीं मालूम है .. आपको मालूम होना चाहिये कि सूरज न तो पश्चिम से और न ही उत्तर से और ना ही दक्षिण से उगता है ..
वह अदना सा व्यक्ति, सामने वाले के सम्मान में, संभवतः सामने वाले का लिहाज करता हुआ, क्रोधित चेहरे को देख रहा था ..
तथाकथित सर्वज्ञाता को प्रणाम कर वह लौट गया ..
वह लौट गया .. तो क्या हुआ ? किसी ने पूछा ..
फिर ..
फिर क्या मालूम क्या हुआ ..
क्योंकि शायद वह शुभचिंतक था इसलिये फिर पलटकर उन्हें क्रोधित करने नहीं जाना चाहता था ..
मैं भी वहां खड़ा था ..
मैं सुन रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
वो कह रहे थे -
किसी के बारे में ..
कि देखो .. वे कितने महान हैं कि जब हमने महान कहते हुए, उनकी तारीफ करने लगे तो नतीजा यह निकला कि वे हमें ही बेवकूफ समझने लगे और फिर वे भूल गये कि वे दरअसल क्या हैं और महान कहने वाले को ही गुस्से से मूर्ख कहकर चुप रहने कह दिया ..
फिर ..
फिर क्या ..
वे महान ..
दरअसल तथाकथित महान व्यक्ति ..
मिलने वाले सम्मान को नहीं बचा पाये और फिर अकेले ही रह गये क्योंकि उनकी तारीफ करने वाले को तो उनने, अपने क्रोध से किनारे कर दिया था ..
मैं सुन रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
किसी के बारे में ..
कि देखो .. वे कितने महान हैं कि जब हमने महान कहते हुए, उनकी तारीफ करने लगे तो नतीजा यह निकला कि वे हमें ही बेवकूफ समझने लगे और फिर वे भूल गये कि वे दरअसल क्या हैं और महान कहने वाले को ही गुस्से से मूर्ख कहकर चुप रहने कह दिया ..
फिर ..
फिर क्या ..
वे महान ..
दरअसल तथाकथित महान व्यक्ति ..
मिलने वाले सम्मान को नहीं बचा पाये और फिर अकेले ही रह गये क्योंकि उनकी तारीफ करने वाले को तो उनने, अपने क्रोध से किनारे कर दिया था ..
मैं सुन रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
वो कह रहे थे - ज़िंदगी में तरक्की की यदि चाहत है तो शायद याद रखना जरूरी है कि सभी को सदैव परम आदरणीय, प्रातः स्मरणीय,अत्यंत सम्माननीय, अत्यंत विवेकशील, अत्यंत मृदु भाषी, अत्यंत पूजनीय, जैसे शब्द-अलंकरण से अलंकृत किया करो .. मैं सुन रहा था .. मैं सोच रहा था ..
Sunday, April 15, 2012
मैं सोच रहा था ..
1. बात पिछले दिनों की है कि मैंने कुछ चेहरे तैल-चित्र में बनाये थे . सभी काल्पनिक थे . उनमें से कुछ आकर्षक व कुछ तो किसी को भी (घर में) पसंद नहीं आ रहे थे . लेकिन ये चेहरे उत्पत्ति थे शायद मेरे अर्ध-चैतन्य चिंतन के .. और वैसे भी ये मेरा बस एक प्रयोग था . इस प्रयोग में जो चेहरे आकर्षक नहीं लग रहे था .. मेरा यकीन मानिये कि ये अनाकर्षक चेहरे कुछ लोगों को इतने पसंद आये कि उनने उसे ज़िद कर रख लिया . मैं सोच रहा था .. कि कोई किसी को नापसंद तो वही किसी को बेहद पसंद हो सकता है ..
इस पर किसी सज्जन ने कहा - उपर वाले ने ऐसी कोई चीज ही नहीं बनाई है कि जो हर किसी को नापसंद हो ..
2. कोई मुझे बतलाये कि सड़क पर चलते हुए .. ऐसा क्यों होता है कि कुछ चेहरे कभी अपनापन लिये हुए लगते हैं तो कुछ चेहरों को देखकर कभी अचानक घृणा के भाव उत्पन्न हो जाते हैं जबकि सचाई तो यह है कि कि अच्छे लगने वाले और अच्छे नहीं लगने वाले .. दोनो ही प्रकार के चेहरे .. पहले कभी भी देखे हुए नहीं होते हैं ..
इस पर किसी सज्जन ने कहा - उपर वाले ने ऐसी कोई चीज ही नहीं बनाई है कि जो हर किसी को नापसंद हो ..
2. कोई मुझे बतलाये कि सड़क पर चलते हुए .. ऐसा क्यों होता है कि कुछ चेहरे कभी अपनापन लिये हुए लगते हैं तो कुछ चेहरों को देखकर कभी अचानक घृणा के भाव उत्पन्न हो जाते हैं जबकि सचाई तो यह है कि कि अच्छे लगने वाले और अच्छे नहीं लगने वाले .. दोनो ही प्रकार के चेहरे .. पहले कभी भी देखे हुए नहीं होते हैं ..
necessary to get posted..
I thought this .. necessary to get posted -
most dangrous and at times suicidal - is the expression of importance i.e. called the VIP SYNDROME .. by a person, who is ill ..
as this makes the doctor .. to think and work under compulsion ..
most dangrous and at times suicidal - is the expression of importance i.e. called the VIP SYNDROME .. by a person, who is ill ..
as this makes the doctor .. to think and work under compulsion ..
Tuesday, April 10, 2012
मैं सोच रहा था ..
मेरे पास नहीं हैं
फिर भी
मैं
उसे
हर किसी को
बांटने के लिये तैयार हूं ..
कोई कह रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
मैं सहमत था ..
फिर भी
मैं
उसे
हर किसी को
बांटने के लिये तैयार हूं ..
कोई कह रहा था ..
मैं सोच रहा था ..
मैं सहमत था ..
कि, कोई शिकायत नहीं ..
मुझे तो
बंद घड़ी से भी
कोई शिकायत
नहीं है ..
मैं सोच रहा था ..
कि ..
वह भी तो 24 घंटे में
2 बार ..
सही समय
बतलाती है ..
बंद घड़ी से भी
कोई शिकायत
नहीं है ..
मैं सोच रहा था ..
कि ..
वह भी तो 24 घंटे में
2 बार ..
सही समय
बतलाती है ..
हकीकत है .. कि
हकीकत है
कि
मेरे चारो तरफ ..
जिधर भी नजर घुमाता हूं ..
महान या अत्यंत महान ही
दिखलाई पड़ते हैं ..
मैं सोच रहा था ..
कि ..
सपने में भी
शायद ..
इसलिये
सभी का
स्तुति गान चालू रखता हूं ..
मेरी इन पंक्तियों को पढ़कर किसी ने कहा - कि आप तो डरपोक किस्म के मालूम पड़ते हैं .. सुनकर मैंने कहा - हुजूर .. कृपया 'किस्म' को हटा दीजिये और "बेहद" विश्लेषण जोड़ दीजिये .. क्योंकि .. मैं आपसे भी डरता हूं .. कि आप भी तो अत्यंत महान हैं ..
कि
मेरे चारो तरफ ..
जिधर भी नजर घुमाता हूं ..
महान या अत्यंत महान ही
दिखलाई पड़ते हैं ..
मैं सोच रहा था ..
कि ..
सपने में भी
शायद ..
इसलिये
सभी का
स्तुति गान चालू रखता हूं ..
मेरी इन पंक्तियों को पढ़कर किसी ने कहा - कि आप तो डरपोक किस्म के मालूम पड़ते हैं .. सुनकर मैंने कहा - हुजूर .. कृपया 'किस्म' को हटा दीजिये और "बेहद" विश्लेषण जोड़ दीजिये .. क्योंकि .. मैं आपसे भी डरता हूं .. कि आप भी तो अत्यंत महान हैं ..
Friday, April 6, 2012
Wednesday, March 21, 2012
psychology ..
दो व्यक्ति नदी में डूब रहे हैं .. आप ऐसी स्थिति में हैं कि केवल एक को ही बचा पायेंगे तो आप किसे बचाना चाहेंगे – उसे जिससे आप बेइंतहा प्यार करते हैं या फिर उसे जो आपसे बेइंतहा प्यार करता है ..
मेरे इस सवाल का कई लोगों ने अलग-अलग तरह से जवाब दिया । कुछ तो सवाल पर ही बौखला गये थे और पूछ बैठे थे कि दोनो rivals एक ही स्थान पर और एक ही समय कैसे .. लोगों की मानसिकता को पढ़ने का यह भी एक तरीका था .. लेकिन मैंने महसूस किया कि अधिकांश थे जो - दोनो में से किसी को भी खोना नहीं चाहते था और शायद इसी वजह से कई ने तो कोई जवाब ही नहीं दिया तो कुछ सोचते हैं .. कहकर किनारा कर गये .. इक्का-दुक्का ही अपनी सोच को व्यक्त कर पाये थे .. तो कुछ ऐसे भी थे जो कारण बता नहीं पा रहे थे कि वे क्यों ऐसा करना चाहते हैं ..
मेरे इस सवाल का कई लोगों ने अलग-अलग तरह से जवाब दिया । कुछ तो सवाल पर ही बौखला गये थे और पूछ बैठे थे कि दोनो rivals एक ही स्थान पर और एक ही समय कैसे .. लोगों की मानसिकता को पढ़ने का यह भी एक तरीका था .. लेकिन मैंने महसूस किया कि अधिकांश थे जो - दोनो में से किसी को भी खोना नहीं चाहते था और शायद इसी वजह से कई ने तो कोई जवाब ही नहीं दिया तो कुछ सोचते हैं .. कहकर किनारा कर गये .. इक्का-दुक्का ही अपनी सोच को व्यक्त कर पाये थे .. तो कुछ ऐसे भी थे जो कारण बता नहीं पा रहे थे कि वे क्यों ऐसा करना चाहते हैं ..
Friday, January 20, 2012
सम्मान और अपमान ..

कोई किसी को सम्मान देता है .. फिर उसकी वजह चोहे कोई भी हो तो यह उसका सौभाग्य है लेकिन .. मैंने यह महसूस किया है कि कभी ऐसा भी होता है कि यदि कोई किसी को सम्मान देते हैं और कारण चाहे कोई भी हो तो सम्मान प्राप्त करने वाला सम्मान देने वाले का निरादर करने लगता है और उसे यह गलतफहमी हो जाती है कि केवल वह ही है जो सर्वत्र जानकार है और बाकी सभी मूढ़-मति ।
जिस तरह से गर्मी में स्वेटर असंगति है ठीक उसी तरह कोई किसी ऐसे विषय पर जिसके बारे में उसे खास जानकारी नहीं हैं अपनी राय देते हुए यह कहे कि वह ही सही हैं और वह भी उस व्यक्ति से जो उस विषय पर सिदध-हस्त है .. और फिर रूके भी नही और झल्लाते हुए व लगभग चीखते हुए कहे कि सामने वाला विषय-सिद्ध-हस्त गलत है .. उसे कुछ भी नहीं मालूम .. और ऐसा इसलिये कि उसने टोककर सही स्थिति से अवगत कराने की कोशिश की । इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं – एक तो यह कि वह आइंदा .. अमुक के सम्मान में, नाराज नहीं करने का सोच कर सही स्थिति नहीं बतायेगा .. व दूसरा कि अमुक भविष्य में न केवल वंचित रह जायगा सही जानकारी से बल्कि सम्मान के बदले में प्राप्त अपना अपमान, हो सकता है कि कमजोर होने की स्थिति में अमुक को अकेला छोड़ दे ।
यहां इतना कह देना पर्याप्त नहीं है क्योंकि ऐसी स्थिति .. फिर वजह चाहे कोई भी हो लेकिन स्वस्थ मानसिकता का परिचायक नहीं है .. और अपने वक्त के प्रभाववश उत्पन्न इस स्थिति का कालांतर में कोई सामाजिक दुष्परिणाम हो इतना ही पर्याप्त नहीं है अमुक को अवसाद की स्थिति में भी ले जा सकता है ।
Friday, January 13, 2012
मैं सोच रहा था ..
चाहे कोई कविता की पंक्तियां हो या कोई लेख या फिर कोई पेंटिंग हो या फिर कोई चेहरा ही क्यों न हो .. सभी एक समान ही स्थितियां हैं .. किसी को कुछ तो किसी को कुछ अच्छा लगता है ..
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